Inaam
मालूम है ना हम जानें तुमको तुमसे ज़्यादा
तुमको मिला है वो सालों से जो भी है माँगा
कैसे खिलौनों की रो-रो के करते थे माँगे
इक बार मिल जाए, दो दिन में ही भूल जाते
लेकिन खिलौनों के दिल तो होते ही नही थे
दिल तो हमारा है, जाने गलत क्या, सही यह
कितना थे चाहते पर अब तुमको याद ना आते हम
क्या याद तुमको तुम हमको इनाम थे कहते?
करते थे कितना कुछ पाने की चाह में पहले
अब यह इनाम का तुम पे इलज़ाम है, जानाँ
दिल है गवाह, जीते जबसे हो, तुमको है हारा
चीज़ें बदलती हैं, इतना हमने भी माना
इतना बदल जाओगे, जाना किसने था, जानाँ
जो था परवाना, अब उसको हमारी परवाह ना, क्यों?
दिल में बात क्या है? हाँ, बोलो हमसे
चाहता और क्या है? हाँ, बोलो हमसे
क्या कमी यहाँ है? हाँ, बोलो हमसे ना
जो कहा, मिला है, हाँ, बोलो हमसे
बदले में भला है, हाँ, बोलो हमसे
माँगा तुमसे क्या है, है माँगा ज़रा सा ही
क्या ही, क्या, हाय
बस जो खत लिखे थे तुमने, उन्हें पढ़ भी लो ज़रा
वादे किए थे जो भी, निभाओ ना ऐसे कभी
इन वादों की स्याही अभी सूखी ही कहाँ
है तुम्हारी ही लिखाई, या भूले हो यह भी?
कहने को "वाह-वाह, तुम फ़िर से इनाम हो जीते"
चेहरे पर मुस्काँ पर आँखें हैं ख़ुश ना कहीं से
हमने कहा था, "हम जानें तुमको तुमसे ज़्यादा"
शायद ग़लत थे पर इतना तो हमने है जाना
हर वो इनाम क़दर के बिना ही है वैसे
घर में पड़ी धूल खाते खिलौनों के जैसे
पल भर बहलाएं पर दिल को ख़ुश ना कर पाएं ये
घर बैठे लिखता था दिल की कहानी मेरी
चारों तरफ़ थी दीवारें, दीवानों से ही
कहता था, "इक दिन जहाँ होगा हाथों में, हाँ"
जो था गुमनामों में, अब हो इनामों पे भी
क़ैदी है, क़ैद ही है फिर भी दीवारों में ही
नामुमकिन ख़्वाबों में नाख़ुश उड़ानें मेरी, ah, ah
